राम काज लगि तव अवतारा

हनुमानजी ने श्री राम की मित्रता वानरराज सुग्रीव से कराई । रीछराज जाम्बवन्त ने प्रभु के कार्य के लिये हनुमानजी का आत्मबल जगाया ।

राम काज लगि तव अवतारा,
हे पवन कुमारा ॥

जो नाँघइ सत जोजन सागर ।
करइ सो राम काज मति आगर ॥

पापिउँ जा कर नाम सुमरहीं ।
अति अपार भव सागर तरहीं ॥

तासु दूत तुम्ह तज कदराई ।
राम हृदय धरि करि ऊपाई ॥

राम काज लगि तव अवतारा ।
सुनतहिं भयउ पर्वताकारा ॥

पवन तनय बल पवन समाना ।
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ॥

कवन सो काज कठिन जग माहीं ।
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं ॥

प्रबिस नगर कीजै सब काजा ।
हृदय राखि कोसलपुर राजा ॥





© श्री राम गीत गुंजन

Shri Ram Geet Gunjan
ramgeetgunjan.blogspot.com

No comments: