पार्ट २ - जय जय गिरिबरराज किसोरी

पुष्प वाटिका में श्री राम और जानकी का नेत्र मिलन हुआ । जानकी जी ने श्री राम को अपने हृदय कमल में बसाकर माता गिरिजा की वन्दना की ।

जय जय गिरिबरराज किसोरी ।
जय महेस मुख चंद चकोरी ॥

जय गज बदन षडानन माता ।
जगत जननि दामिनि दुति गाता ॥

नहिं तव आदि मध्य अवसाना ।
अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना ॥

भव भव बिभव पराभव कारिनि ।
बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि ॥

सेवत तोहि सुलभ फल चारी ।
बरदायनी पुरारि पिआरी ॥

देबि पूजि पद कमल तुम्हारे ।
सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे ॥



© श्री राम गीत गुंजन

Shri Ram Geet Gunjan
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