भये प्रगट कृपाला

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जो समस्त लोकों को शान्ति देने वाले हैं, धर्म की स्थापना एवं लोक कल्याण के लिये, चैत्र शुक्ल नवमी के दिन, अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में प्रगट हुए।

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी .
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ..

लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी .
भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी ..

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता .
माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता ..

करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता .
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रकट श्रीकंता ..


बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार .
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ..



© श्री राम गीत गुंजन

Shri Ram Geet Gunjan
ramgeetgunjan.blogspot.com

4 comments:

Kuldeep Thakur said...

सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

आप की ये रचना 19-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

Pratibha Verma said...

बेहतरीन प्रस्तुति !!
पधारें बेटियाँ ...

Madan Mohan Saxena said...

सुंदर एवं भावपूर्ण रचना.बेहतरीन
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कविता रावत said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें..